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नये युग की शुरुआतः मुख्यमंत्री ने 12,710 अध्यापकों के साथ जुड़ा ‘कच्चा’ शब्द हटाया ठेका आधारित अध्यापकों को रेगुलर नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपे

अमित पाण्डेय।
चंडीगढ़। राज्य में ‘नये युग की शुरुआत’ की दिशा में कदम उठाते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज शिक्षा विभाग में काम कर रहे 12,710 ठेका आधारित अध्यापकों को रेगुलर नियुक्ति के पत्र सौंप कर अध्यापक वर्ग के साथ किये बड़े वायदा को पूरा कर दिखाया है।

यहाँ टैगोर थियेटर में हुए एक समागम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पद संभालने के बाद सभी कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को पार करते इन अध्यापकों की सेवाओं को रेगुलर करने पर ज़ोर दिया है। भगवंत मान ने कहा कि इस फ़ैसले का मंतव्य अध्यापकों के सुरक्षित भविष्य को यकीनी बनाना है क्योंकि उनका विश्वास है कि अगर अध्यापकों का भविष्य सुरक्षित है तो ही वे विद्यार्थियों की किस्मत को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से किये गए ठोस प्रयासों स्वरूप ही आज यह ऐतिहासिक दिन देखने को मिल रहा है।

अन्य मुलाजिमों के साथ अपनी भावुक सांझ ज़ाहिर करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि हर मुलाज़िम की समस्या का समाधान किया जायेगा, जिसके लिए राज्य सरकार पहले ही हर संभव यत्न कर रही है। यह कहते कि वह अध्यापक वर्ग को पेश सभी समस्याओं का समाधान करने के लिए मौजूद हैं, भगवंत मान ने कहा कि वह एक अध्यापक के पुत्र होने के नाते अध्यापकों की समस्याओं को अच्छी तरह जानते हैं और अध्यापकों को पेश सभी समस्याओं को समाधान करना उनका फर्ज है। उन्होंने कहा कि सरकारी ख़ज़ाना लोगों का है और समाज के हर वर्ग की भलाई के लिए एक- एक पैसा समझदारी से इस्तेमाल किया जायेगा।

एक कलाकार के तौर पर उनकी अथक कोशिशों के कारण ही सरहदी गाँव की एक लड़की की ज़िंदगी बदलने का किस्सा सुनाते हुये मुख्यमंत्री ने बताया कि उस लड़की को शिक्षा प्राप्त करने के लिए बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था परन्तु उनके विनम्र यत्नों के कारण ही उसकी कोशिशें रंग लायी और उसने सफलता की नयी कहानी लिखी। उन्होंने कहा कि अगर एक कलाकार ऐसा कर सकता है तो राज्य का प्रमुख तो और भी बहुत कुछ कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि इन अध्यापकों को कम वेतनों पर काम करना पड़ा और पुरानी सरकारों की बेरुख़ी के कारण उनको अपने जायज़ हकों के लिए प्रदर्शन करना पड़ा। भगवंत मान ने कहा कि मनरेगा के अधीन काम करते मज़दूरों को भी अध्यापकों की अपेक्षा अधिक वेतन मिलता था। उन्होंने अफ़सोस ज़ाहिर करते हुये कहा कि यह राष्ट्र निर्माताओं पर अत्याचार नहीं तो और क्या है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किसी पर कोई अहसान नहीं है, बल्कि राज्य और जनता की सेवा करना उनका प्रारंभिक फर्ज है। भगवंत मान ने कहा कि वह खुश हैं कि राज्य के लोगों ने उन पर इतना भरोसा जताया है और वह इस विश्वास को कायम रखने के लिए हर संभव यत्न करेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास और लोगों की खुशहाली को यकीनी बनाने के लिए हर संभव यत्न कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब से इन अध्यापकों के नाम आगे से ‘कच्चे’ शब्द हमेशा के लिए हट जायेगा। उन्होंने कहा कि इन अध्यापकों को हर साल पाँच प्रतिशत वेतन वृद्धि के साथ-साथ छुट्टियों सहित अन्य लाभ भी दिए जाएंगे। भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार ने एक और ऐतिहासिक पहलकदमी करते हुये फ़ैसला किया है कि अध्यापक सिर्फ़ अध्यापन कार्य से सम्बन्धित सेवा निभाएंगे और उनकी किसी ग़ैर- अध्यापन कार्य के लिए ड्यूटी नहीं लगाई जायेगी।

मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से राज्य में जनगणना के लिए 66,000 अध्यापकों की माँग की गई थी, जिससे उनकी तरफ से स्पष्ट शब्दों में इन्कार कर दिया गया और केंद्र सरकार को इस मंतव्य के लिए बेरोजगार नौजवानों को भर्ती करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि इससे नौजवानों को सरकारी कामकाज करने के बारे जानकारी हासिल करने के साथ-साथ उनके हुनर विकास में भी मदद मिलेगी। भगवंत मान ने कहा कि ऐसे फ़ैसले सिर्फ़ वही व्यक्ति ले सकता है जो ज़मीनी स्तर पर लोगों के साथ जुड़ा हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े- बड़े घरों में रहने वाले नेता ऐसे फ़ैसले नहीं ले सकते क्योंकि वह ज़मीनी हकीकतों से अवगत नहीं हैं। भगवंत मान ने कहा कि चाहे उनके पास इतने बड़े घर नहीं हैं परन्तु लोगों का अथाह प्यार और विश्वास ही उनकी सारी जायदाद और ख़ज़ाना है। उन्होंने कहा कि जब राज्य के लोग उनके साथ हैं तो पैसे और धन- दौलत के रूप में और किसी चीज़ की ज़रूरत नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली राज्य सरकारों ने अपने कार्यकालों के आखि़री समय थोड़ी-बहुत रियायतें देकर लोगों को मूर्ख बनाया है। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने अपने शासन के दौरान लोगों को लूटा है और कभी भी उनकी भलाई के लिए कोई विशेष फ़ैसले नहीं लिए। भगवंत मान ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के लोगों की भलाई को यकीनी बनाने के लिए सत्ता में आने के पहले दिन से ही लगातार काम कर रही है।

मुख्यमंत्री ने आशा अभिव्यक्त की कि यह अध्यापक राज्य में शिक्षा प्रदान करने के लिए पूरी ज़िम्मेदारी और तनदेही के साथ अपनी सेवाएं निभाएंगे। उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं, जब राज्य सरकार और अध्यापकों के सांझे यत्नों स्वरूप ही पंजाब मानक शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन कर उभरेगा। भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में नयी क्रांति देखने को मिल रही है और हम सभी खुशकिस्मत हैं कि हम इस उद्यम का हिस्सा हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह हवाई अड्डों पर रनवे हवाई जहाज़ को सुचारू ढंग के साथ उड़ान भरने की सुविधा देते हैं, उसी तरह राज्य सरकार विद्यार्थियों के सपनों को साकार करने में मदद कर रही है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि विद्यार्थियों के विचारों को प्रफुल्लित करने के लिए हर संभव यत्न किये जा रहे हैं और इस कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जायेगी। भगवंत मान ने अध्यापकों से अपील की कि वह समाज में नौजवानों की अपनी अलग पहचान बनाने के लिए उनकी मदद करने के लिए हर संभव यत्न करें।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार जल्द ही सरकारी स्कूलों में पढ़तीं छात्राआें के लिए बस सेवा शुरू करेगी और इसलिए 20,000 विद्यार्थियों के लिए पायलट प्रोजैक्ट शुरू किया जायेगा, जिसमें 12,000 लड़कियाँ और 8000 लड़के शामिल होंगे। उन्होंने बताया कि इस स्कीम के लिए 21 करोड़ रुपए का बजट पास किया जा चुका है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़तीं छात्राओं को सहूलतें प्रदान करना है। भगवंत मान ने कहा कि इन बसों को जी. पी. एस. सिस्टम के साथ लैस किया जायेगा जिससे अभिभावक बसों की आवाजाही पर नज़र रख सकें। उन्होंने आगे कहा कि यह कदम सरकारी स्कूलों में पढ़तीं लड़कियों की सुरक्षा यकीनी बनाने की दिशा की तरफ अहम भूमिका निभाएगा।

इससे पहले इक्ट्ठ को संबोधन करते हुये शिक्षा मंत्री हरजोत बैंस ने विभाग में क्रांति के नये दौर की शुरुआत करने के लिए मुख्यमंत्री की सराहना की।

ज़िक्रयोग्य है कि बी. ए पास शिक्षा प्रोवाईडर (एसोसिएट टीचर) जो पहले 9500 रुपए वेतन ले रहे थे, को अब 20500 रुपए वेतन के तौर पर मिलेंगे, जबकि ई. टी. टी. और एन. टी. टी. योग्यता वाले अध्यापकों को मौजूदा 10250 रुपए के वेतन के मुकाबले 22000 रुपए मिलेंगे। उन्होंने कहा कि इसी तरह बी. ए. / एम. ए. बी. ऐड्ड डिग्रियों वाले ऐसे अध्यापक, जो इस समय पर 11000 रुपए वेतन ले रहे हैं, को अब 23500 रुपए वेतन मिलेगा। आई. ई. वी. वालंटियर जो अब तक 5500 रुपए वेतन ले रहे थे, को अब 15,000 रुपए वेतन मिलेगा। इसी तरह 3500 रुपए वेतन ले रहे शिक्षा वालंटियरों को अब 15,000 रुपए और 6000 रुपए वेतन ले रहे ई. जी. एस., ई. आई. ई. और एस. टी. आर. अध्यापकों को अब 18,000 रुपए मिलेंगे।

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