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पौराणिक श्रृंगीनारी शांता देवी मंदिर में श्रद्धालुओं ने किया पूजा अर्चना

परसरामपुर/ बस्ती। नव रात्रि पर्व अष्टमी तिथि के पावन अवसर पर व्रतधारियों और श्रृद्धालुओं ने शान्ता माता मंदिर में पूजन अर्चन कर मनौती मांगी। हर वर्ष नव रात्रि पर्व हो या फिर हर मंगलवार को श्रृद्धालु माता का दर्शन कर पूजा अर्चना करते हैं और यह मंदिर जन आस्था का केन्द्र बना हुआ है।इस बार अष्टमी तिथि मंगलवार दिन पड़ने से मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। बुधवार नवमी तिथि को श्रृद्धालु मंदिर प्रांगण में हवन पूजन कराते हैं और अपने नवरात्रि व्रत का समापन करते हैं।

पौराणिक मान्यता है जब चौथे पन में महाराज दशरथ को मखौड़ा धाम में पुत्रकामेष्टि यज्ञ के बाद भगवान राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न की प्राप्ति हुई थी । महाराज दशरथ ने अपनी पुत्री शांता देवी का विवाह यज्ञ के आचार्य श्रृंगी ऋषि के साथ किया था । यज्ञ समापन के उपरांत श्रृंगी ऋषि मां शांतादेवी को लेकर मखौड़ा धाम के पूर्व इसी स्थान पर आकर कुछ दिनों तक विश्राम किया था और तपस्या की थी। कालांतर में श्रृंगी ऋषि मां शांता देवी को छोड़कर वनो में तपस्या करने चले गए इसी ऐतिहासिकता के चलते यह स्थान श्रृंगी नारी कहलाया श्रृंगी ऋषि के चले जाने के बाद मां शांता देवी ने पिंडी बना कर मां भगवती की पूजा अर्चना की थी।

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