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अब पोल खुलने के बाद भाजपा ने नया बहाना ढूंढा है कि दिल्ली सरकार ने इसका रखरखाव नहीं की- सौरभ भारद्वाज

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने रविवार को हरियाणा सरकार के साथ हुए दिल्ली सरकार के कई पत्राचारों को देश के सामने रखा और स्पष्ट कर दिया कि आईटीओ बैराज हरियाणा सरकार के अधीन है। ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि आईटीओ बैराज को लेकर भाजपा लगातार झूठ बोल रही थी। अब सात दिन बाद आखिरकार भाजपा शासित हरियाणा के सीएम खट्टर साहब ने माना लिया कि आईटीओ बैराज उनके अधीन है। पहले दिल्ली और हरियाणा पंजाब में थे, जब दोनों अलग राज्य बने, तब पंजाब ने आईटीओ बैराज को हरियाणा सरकार को दे दिया। उन्होंने पत्रों का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली सरकार हरियाणा सरकार से आईटीओ बैराज दिल्ली को देने की कई बार मांग कर चुकी है। अब पोल खुलने के बाद भाजपा ने बचने का नया बहाना ढूंढ लिया है कि दिल्ली सरकार ने इसका रखरखाव नहीं की। उन्होंने कहा कि आईटीओ बैराज के पांच गेट नहीं खुलने की वजह से रेगुलेटर टूट गए। इससे यमुना का जलस्तर बढ़ गया और दिल्ली में बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।

पार्टी मुख्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एक हफ्ते की जद्दोजहद के बाद आखिरकार कल भारतीय जनता पार्टी शासित हरियाणा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने माना कि दिल्ली का आईटीओ बैराज हरियाणा सरकार के अधीन है। 3 दिन पहले तक बीजेपी के सांसद रमेश बिधूड़ी ट्वीट पर लिखकर कह रहे थे कि आईटीओ बैराज हरियाणा का नहीं, बल्कि दिल्ली का है। इसके बाद मैंने विकिपीडिया पर उपलब्ध जानकारी उनसे शेयर की, जिसमें साफ लिखा है कि आईटीओ बैराज हरियाणा सरकार का है। अब हरियाणा सरकार ने मान लिया कि आईटीओ बैराज मेंटेन नहीं था और उसके पांच गेट्स नहीं खोले गए। ये पांच गेट्स न खुलने की वजह से यमुना के अंदर जलस्तर बढ़ गया। दिल्ली सरकार के रेगुलेटर क्षतिग्रस्त हुए और यमुना का पानी आईटीओ, शांतिवन समेत कई संवेदनशील इलाकों में घुस गया। ऐसे में अब लीपापोती करने के लिए बीजेपी ने बहाना सोचा है कि इस बैराज की मेंटेनेंस के पैसे दिल्ली सरकार नहीं दे रही है, जोकि बेहद हास्यास्पद है।

उन्होंने कहा कि 31 अगस्त 2017 को इरिगेशन एंड फ्लड कंट्रोल सेक्रेटरी केशव चंद्रा ने एक पत्र लिखा था। इस पत्र के जरिए दिल्ली सरकार ने हरियाणा सरकार को कहा कि पहले पंजाब के अंदर दिल्ली और हरियाणा आते थे। फिर दिल्ली बना, हरियाणा बना और जो एसेस्ट्स पंजाब से हरियाणा को मिले थे, उसमें यह बैराज भी पंजाब ने हरियाणा को दिया था। यह गलती थी। मगर अब इस बैराज को वापस दिल्ली सरकार को दे दीजिए। इस पत्र में उन्होंने 2015 में हरियाणा भवन में दिल्ली और हरियाणा के अधिकारियों की बैठक का भी हवाला दिया। उसके बाद 2015 में सेक्रेटरी इरिगेशन एंड फ्लड कंट्रोल ने हरियाणा के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी इरिगेशन एंड फ्लड कंट्रोल को पत्र लिखा कि ये बैराज दिल्ली सरकार को दे दीजिए। फिर 2021 में भी दिल्ली के चीफ इंजीनियर इरिगेशन एंड फ्लड ने हरियाणा के चीफ इंजीनियर इरिगेशन एंड फ्लड को पत्र लिखा, जिसमें कहा कि आप इस बैराज को मेनटेंन नहीं करते है, इसलिए बैराज हमें दे दीजिए। इसके बाद साल 2022 में इरिगेशन एंड फ्लड सेक्रेटरी दिलराज कौर ने फिर से हरियाणा सरकार को पत्र में लिखा कि यह बैराज दिल्ली के अंदर है और दिल्ली के लिए है। ऐसे में इस बैराज को दिल्ली सरकार को दे दीजिए। मगर हरियाणा सरकार ने बैराज नहीं दिया।

‘‘आप’’ के वरिष्ठ नेता एवं कैबिनेट मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि साल 2022 में दिल्ली सरकार की ओर से हरियाणा सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट लिखा है कि आईटीओ बैराज के गेट्स नॉन फंक्शनिंग होने के चलते हथिनी कुंड बैराज से ज्यादा पानी आने पर दिल्ली में बाढ़ आ सकती है। ऐसे में इस बैराज को हमें सौंप दीजिए या फिर इसके गेट खुलवाइए। मगर फिर भी हरियाणा सरकार ने कुछ नहीं किया। अब ये एक कंपनी का नाम लेकर कह रहे हैं कि कंपनी ने इनको पैसे नहीं दिए। जबकि वो बिजली की कंपनी थर्मल पावर प्लांट चलाती थी। जब कंपनी इनसे पानी लेती थी, तो इन्हें पैसा देती थी। अब उन्होंने पानी लेना बंद कर दिया और इनको पैसा देना बंद कर दिया। बिजली का मीटर भी हटा दिया। उनसे इनका करार पहले ही खत्म हो चुका है। आखिर अब ये किस चीज का पैसा मांग रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आखिर बीजेपी शासित हरियाणा सरकार आईटीओ बैराज अपने पास क्यों रखना चाहती है? मैं दिल्ली के जल, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री होने के नाते कहूंगा कि इतना कुछ होने के बाद अब तो बैराज हमें दे दीजिए। अगर आपकी नियत में खोट है तभी जबरदस्ती इसे अपने पास रखे हैं और दिल्ली को बाढ़ में झोंकते रहे हैं। मैं केंद्र सरकार और बीजेपी नेताओं से कहूंगा कि अगर आपकी नियत साफ है तो इस बैराज को दिल्ली सरकार को दे दीजिए। दिल्ली सरकार इसे अच्छे से मेंटनेंट करेगी।

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